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श्री गिरीश भा. प्रधान
अध्यक्ष
(22 अक्तूबर 2013 से पदासीन हैं)

Shri Gireesh B. Pradhan

  राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर दोनों के 37 वर्षों से अधिक सिविल सेवा कैरियर का अनुभव रखने वाले श्री गिरीश भा. प्रधान का जन्म 20 दिसम्बर 1952 को मुंबई में हुआ। इन्होंने सेंट जेवियर स्कूल, जयपुर, राजस्थान (1969) से स्कूल की शिक्षा प्राप्त की तथा सेंट स्टीफन कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास (आनर्स) में (1970-73) में स्नातक डिग्री प्राप्त की। इन्होंने वर्ष (1973-75) में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री (इतिहास) में प्राप्त की, स्कूल ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, कार्लेटन विश्वविद्यालय, ओटावा, कनाडा से लोक प्रशासन स्नातकोत्तर (एमपीए 1984-85) की डिग्री प्राप्त की एवं नेशनल डिफेंस कालेज (एनडीसी 1992) से स्टेटेजिक अध्ययन में मास्टर की डिग्री प्राप्त की। औपचारिक शैक्षणिक कार्यक्रमों के अलावा, श्री प्रधान ने विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सेवा कार्यक्रमों में भी भाग लिया।

  वर्ष 1977 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व, श्री प्रधान ने दिल्ली विश्वविद्यालय में अंडरग्रेज्युट स्तर पर इतिहास पढ़ाया एवं स्टेट बैंक ग्रुप में प्राबेशनरी अधिकारी के रूप में कार्य किया। उन्हें वर्ष 1977 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में महाराष्ट्र का कैडर आवंटित किया गया एवं इन्होंने राज्य एवं जिला स्तर पर महाराष्ट्र राज्य में कार्य किया। उन्होंने महाराष्ट्र के शोलापुर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, मुंबई, ठाणे, नागपुर एवं पुणे जैसे विभिन्न जिलों में विनियामक एवं विकासात्मक कार्य़ों को संचालित किया।


वे वर्ष 1980-81 में सिंधु दुर्ग के नए जिले से निकटता से संबद्ध रहें। बाद में, उन्होंने महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड के सदस्य एवं सचिव के रूप में कार्य किया। श्री प्रधान पुणे के नगरपालिका आयुक्त एवं मुंबई के अपर नगरपालिका आयुक्त रहे। यशवंत राव चव्हाण ऐकेडमी आफ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन के महानिदेशक के रूप में वे उस संस्था को देश का उच्च सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थान बनाने में अग्रणी रहे। स्वतंत्र भारत में सिविल सेवा सुधारों के लिए उनके पास मोनोग्राफ है।

श्री प्रधान ने राष्ट्रीय स्तर पर, खाद्य एवं सिविल आपूर्ति, गृह कार्य एवं विद्युत मंत्रालय में कार्य किया है। इन्होंने वर्ष 1992 से 1997 तक भारत के राष्ट्रपति के कार्यालय में निदेशक तथा राष्ट्रपति के संयुक्त सचिव दोनों के रूप में कार्य किया। उन्होंने वर्ष 2002 से 2003 तक लोक सभा के स्पीकर के सचिव के रूप में कार्य किया।

श्री प्रधान ने नवम्बर 2003 में विद्युत मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया जहां उन्होंने योजना, समन्वयन, ऊर्जा कुशलता, पारेषण एवं ओएम सहित विभिन्न विषयों में महत्वपूर्ण कार्य किया। वे जनवरी, 2008 में अपर सचिव के रूप में पदोन्नत हुए और पावर ग्रिड कार्पोरेशन आफ इंडिया लि. से संबंधित मामलों एवं उनकी केन्द्रीय क्षेत्र परियोजनाओ, पावर ट्रेडिंग कार्पोरेशन, पावर फाइनेंस कार्पोरेशन, प्रचालन एवं मानिटरिंग, समन्वयन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, जलवायु परिवर्तन एवं विद्युत मंत्रालय के सूचना तकनीक प्रभाग से संबंधित मामलों को शामिल करते हुए नीति एवं योजना, पारेषण में कार्य किया। उन्होंने दामोदर घाटी निगम के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

श्री प्रधान 1 फरवरी, 2011 से विद्युत मंत्रालय में विशेष सचिव के रूप में पदोन्नत किए गए और अक्तूबर, 2011 में उन्होंने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (एमएनआरई) मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण किया।

उक्त के अलावा, श्री प्रधान ने विद्युत क्षेत्र से संबंधित विवेच्य रिपोर्टो के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उनका राज्य तथा केन्द्रीय स्तर दोनों पर विद्युत क्षेत्र में (12 वर्षों) का एक दीर्घकालीन अनुभव रहा है। वे नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के अंतर्गत एक मिशन जवाहरलाल नेहरु राष्ट्रीय सौर मिशन नामक मिशन में सक्रिय रूप से शामिल रहे जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा में विश्व लीडर के रूप में भारत को स्थापित करना रहा है।

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