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श्री रविंदर सिंह ढिल्लों

सदस्य (वित्त)

(17 फरवरी, 2025 – कार्यरत)

Shri Ravinder Singh Dhillon

श्री रविन्दर सिंह ढिल्लों वर्तमान में केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग (केविवआ) के सदस्य (वित्त) के पद पर कार्यरत हैं, जो कि उन्होंने फरवरी, 2025 में ग्रहण किया। विद्युत क्षेत्र, अवसंरचना वित्त, और विनियामक नीति में चार दशकों से अधिक के विशिष्ट अनुभव के साथ, वे आयोग में तकनीकी विशेषज्ञता, वित्तीय नेतृत्व, और विद्युत मूल्य श्रृंखला की गहन समझ का दुर्लभ मिश्रण लेकर आए हैं। उनका करियर, भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रांति लक्ष्यों के साथ एक सशक्त संरेखण और सभी के लिए किफायती विद्युत को बढ़ावा देने के संदृष्य की ओर समर्पण दर्शाता है।

केविविआ में नियुक्ति से पूर्व, जून 2020 से मई 2023 तक, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) - भारत में सबसे बड़ी एनबीएफसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में, श्री ढिल्लों ने कई उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए संगठन का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में, पीएफसी को प्रतिष्ठित ‘महारत्न’ का दर्जा दिया गया – जिससे इसे भारत के अग्रणी केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में से एक के रूप में मान्यता मिली। उन्होंने पीएफसी के पोर्टफोलियो को विद्युत से परे अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में सफलतापूर्वक विविधता प्रदान की। उनके विशिष्ट कार्यकाल के दौरान, पीएफसी ने प्रथम बार पांच अंकों को छूते हुए रुपए 10,222 करोड़ के लाभ के साथ, निरंतर तीन वर्षों के लिए अब तक का सबसे ऊंचा वार्षिक लाभ प्राप्त किया।

श्री ढिल्लों ने अत्यधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर विविधघरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्रोतों से पूंजी जुटाकर पीएफसी के वित्त पोषण आधार को भी मजबूत किया। प्रमुख पहलों में कंपनी के बाँड्स का पहला पब्लिक इश्यू, 300 मिलियन यूआर ग्रीन बॉन्ड जारी करना, और 875 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर जेपीवाई-मूल्यवर्ग का ऋण शामिल था - पीएफसी द्वारा एकल लेनदेन में अब तक उठाया गया सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा ऋण। इन पहलों ने मजबूत निवेशक विश्वास का प्रदर्शन किया और पीएफसी के ईएसजी अभिविन्यास को मज़बूत किया।

उन्होंने कई ऐतिहासिक पहलों पर विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) की अवधारणा और रोलआउट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका परिव्यय 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक है, और कोविड-19 महामारी के दौरान चलनिधि अंतर्वेशन योजना को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया, जिसने विद्युत क्षेत्र में एक बड़े तरलता संकट को रोकने में मदद की, जिसमें पीएफसी और आरईसी ने 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का संवितरण किया। उनके नेतृत्व में, पीएफसी ने विलंबित भुगतान अधिभार (एलपीएस) नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया, जिसने उत्पादकों और पारेषण कंपनियों को विद्युत वितरण कंपनियों के बकाया को कम करने में मदद की।

विद्युत क्षेत्र में श्री ढिल्लों का योगदान उनकी कार्यकारी भूमिकाओं से आगे है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में रुकी हुई हाइड्रो परियोजनाओं के अधिग्रहण के संबंध में समिति के अध्यक्ष, राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के वित्तपोषण के लिए अंतर-मंत्रालयी संचालन समिति के सदस्य, राष्ट्रीय विद्युत योजना को अंतिम रूप देने के लिए समिति के सदस्य और आरडीएस, आईपीडीएस और डीडीयूजीजेवाई जैसी सरकारी योजनाओं के लिए निगरानी समितियों के सदस्य सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय समितियों में कार्य किया है। उन्हें सीएमडी, आरईसी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।

परियोजना वित्तपोषण में व्यापक अनुभव के साथ, श्री ढिल्लों ने व्यवसाय विकास, ऋण मूल्यांकन, निधि संवितरण, ऋण निगरानी और तनावग्रस्त परिसंपत्ति समाधान में पहल की है। उन्होंने पांच वर्षों में लगभग 46% सीएजीआर की नवीकरणीय पोर्टफोलियो वृद्धि हासिल करते हुए पीएफसी की नवीकरणीय ऊर्जा वित्तपोषण पहलों का नेतृत्व किया। उन्होंने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी स्टोरेज और अपशिष्ट-से-ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए एक नई व्यवसाय इकाई की स्थापना की। उन्होंने परियोजना रेटिंग मॉडल को बेहतर बनाकर और परियोजना निगरानी के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल प्रस्तुत कर क्रेडिट मूल्यांकन और निगरानी प्रणालियों को मजबूत कर आंतरिक प्रणालियों में भी संवर्धन किया, जिससे संपत्ति की गुणवत्ता में वृद्धि हुई।

पीएफसी के अतिरिक्त, श्री ढिल्लों ने जीई पावर इंडिया लिमिटेड के बोर्ड में गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक, महाप्रीत एल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड के सलाहकार बोर्ड के सदस्य और भारतीय स्टेट बैंक और मैकिन्से एंड कंपनी के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्य किया है। इससे पूर्व अपने करियर में उन्होंने केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) में कार्य किया। सीईए में, उन्होंने प्रमुख उत्पादन स्टेशनों के लिए प्रादेशिक पारेषण नेटवर्क और निकासी प्रणालियों की योजना बनाने के लिए विद्युत प्रणाली अध्ययन किया। बीएचईएल में, वह 210 मेगावाट और 500 मेगावाट उत्पादकों के डिज़ाइन और 210 मेगावाट उत्पादकों के ऑन-साइट आशोधन में शामिल थे।

श्री ढिल्लों के पास भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) से विद्युत प्रणालियों में एम.टेक और थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.ई. है। इन शैक्षणिक प्रत्यय-पत्रों ने उन्हें एक मज़बूत तकनीकी आधार प्रदान किया जो वित्तीय और कॉर्पोरेट प्रबंधन में उनके व्यापक अनुभव का पूरक है।

ऊर्जा और अवसंरचना क्षेत्रों में उनके योगदान के सम्मान में, श्री ढिल्लों को कई प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए गए हैं, जिनमें उनकी अग्रणी ऊर्जा संक्रांति पहलों के लिए “स्कॉच इंडिया इकोनॉमिक फोरम अवार्ड” और भारत के विद्युत क्षेत्र के त्वरित विकास में उनके असाधारण नेतृत्व और योगदान के लिए गवर्नेंस नाओ द्वारा “सीएमडी लीडरशिप अवार्ड (महारत्न)” शामिल हैं।

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