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प्रभाग

केविविआ का विधि प्रभाग मुख्यतः सभी प्रकार की याचिकाओं का निपटान करता है, याचिकाओं का विधिमान्यकरण और संवीक्षा करता है, सुनवाई की तारीखों को अनुसूचित करता है और यथा अपेक्षित विधिक गतिविधियाँ करता है। विधि प्रभाग का मुख्य कार्य है:

  • टैरिफ, अनुज्ञप्ति प्रदान किए जाने, प्रोत्साहन, अननुसूचित अंतरविनिमय, अतिरिक्त पूंजीकरण से संबंधित प्राप्त सभी प्रकार की याचिकाओं और सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और एपटेल में दाखिल अपील/याचिकाओं सहित सभी अंतरराज्यिक मामलों का निपटान करना।
  • विद्यमान विनियमों/आदेशों और कानून, कारोबार का संचालन विनियमों और विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार अनुपालन आवश्यकताओं के संबंध में याचिकाओं का विधिमान्यकरण करना।
  • नोटिस तैयार करना, सुनवाई की तारीखें निर्धारित करना, नोटसों को प्रेषित करना, सुनवाई की अनुसूची तैयार करना।
  • अपीलों/याचिकाओं की संवीक्षा करना, आधार तैयार करना, कार्यवाहियों, याचिकाओं, अभिवचनों और मामलों के सूचीकरण सहित न्यायिक/अर्ध-नयायिक मामलों के निपटान में आयोग को विधिक इनपुट प्रदान करना और कार्यवाहियों का अभिलेख (आरओपी) तैयार करना।
  • आदेश, विनियम, और संशोधनों की अधिसूचना से संबंधित विधिक गतिविधियाँ करना; उसका अंतिम दस्तावेज तैयार करना।

केविविआ का इंजीनियरिंग प्रभाग मुख्यतः टैरिफ के विभिन्न प्रकार और अन्य याचिकाओं का निपटान करता है, विनियम बनाता है और जहां भी आवश्यकता हो तकनीकी मामलों पर इनपुट प्रदान करता है। इंजीनियरिंग प्रभाग का प्रमुख कार्य है:

  • अंतिम टैरिफ, ग्रिड प्रचालन, प्रोत्साहन और संबद्ध मामलों, यूआई/आरएलडीसी, अनुज्ञप्ति प्रदान करना – पारेषण, व्यापार, पावर एक्सचेंज का अनुमोदन, प्रचालन मानदंडों से संबंधित कठिनाइयों को दूर करना, लाभार्थियों और उत्पादकों के बीच तकनीकी मामलों का न्यायनिर्णयन और निर्बाध पहुंच, विभिन्न विनियमों से संबंधित याचिकाओं का निपटान करना।
  • टैरिफ, संयोजकता, अल्पकालिक, मध्यकालिक निर्बाध पहुंच और दीर्घकालिक पहुंच और संबंध मामलों से संबंधित विनियम तैयार करना, आईईजीसी के लिए विनियम, यूआई और ग्रिड प्रचालन और प्रबंधन, ग्रिड अनुशासन और यूआई भुगतान से संबंधित मामलों का निपटान करना।
  • मौखिक सुनवाई के लिए तथ्य शीट/संक्षिप्त नोट तैयार करना।
  • अंतिम/अंतरिम आदेशों के लिए नोट प्रदान करना।
  • विद्यमान विनियमों में परिवर्तन/परिवर्धन का सुझाव देना।
  • आयोग के निर्देशानुसार नए विनियम बनाने में इनपुट प्रदान करना।
  • संसद में उठाए गए मामलों के लिए और एपटेल/कोर्ट में लंबित तकनीकी मामलों में इनपुट प्रदान करना।
  • तकनीकी मामलों में आयोग को उसकी कार्यवाहियों के निर्वहन में सहयोग करना।

वित्त प्रभाग की गतिविधियों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है अर्थात् बाह्य वित्त और आंतरिक वित्त। बाह्य वित्त मुख्यतः टैरिफ और अनुज्ञप्तिकरण से संबंधित मामलों का निपटान करता है, जबकि आंतरिक वित्त में बजट प्रबंधन, वित्त अनुपालनों और विविध संपरीक्षा गतिविधियों का निपटान शामिल है। दोनों कार्यों की गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है:
बाह्य वित्त की गतिविधियाँ:

  • विनियमों की ड्राफ्टिंग हेतु इनपुट, वित्तीय मानदंडों के लिए प्रतिमानक निर्धारण और समीक्षा करना।
  • अंतर-राज्यिक पारेषण के साथ-साथ टैरिफ उत्पादन (हाइड्रो और थर्मल) का अवधारण। इसमें निम्नलिखित उप-गतिविधियाँ शामिल हैं:
  • समुचित मॉडल का विकास और एपटेल आदि के विनियमों/निर्णयों में परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए अपेक्षित आवश्यक आशोधन।
  • याचिका की जाँच के बाद तकनीकी विधिमान्यकरण तैयार करना।
  • याचिका की सूचीकरण के लिए सूचना की पर्याप्तता के लिए सूचना की जाँच।
  • तथ्य शीट तैयार करना।
  • टैरिफ निर्माण।
  • एपटेल, उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय में लंबित वित्तीय मामले के लिए टिप्पणियाँ/इनपुट भी प्रदान करना।
  • नेट वर्थ और अनुपात विश्लेषण वाली व्यापार अनुज्ञप्ति जारी करना।
  • पारेषण अनुज्ञप्ति जारी किए जाने के इनपुट प्रदान करना।
  • प्रतिस्पर्धात्मक बोली रूट के माध्यम से आने वाली टैरिफ याचिका के अंगीकरण की जाँच।
  • जेनेरिक टैरिफ के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों के लिए वित्तीय इनपुट प्रदान करना।
  • आयोग द्वारा प्रदत्त अध्ययनों के लिए टैरिफ मॉडल का विकास।

आंतरिक वित्त की गतिविधियाँ:

  • बजट तैयार करना।
  • सहमति के लिए वित्तीय व्यय हेतु प्रस्तावों की संवीक्षा
  • नगद प्रबंधन
  • आंतरिक संपरीक्षा
  • सीएजी संपरीक्षा
  • केविविआ के अतिरिक्त, यह गतिविधियाँ एफओआर, एफओआईआर और साफिर के लिए भी की जाती हैं।

आयोग में विनियामक मामले प्रभाग का दायित्व आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया में नीति और विनियामक इनपुट प्रदान करना है। विनियामक प्रभाग के प्रमुख दायित्व निम्नानुसार हैं:

  • उभरती प्रवृत्तियों, नीति मामलों (ईए, 2003, अधिनियम के अधीन जारी नीतियों/दिशानिर्देशों को शामिल करते हुए) की निगरानी जिनका आयोग के कार्यों पर प्रभाव पड़ता है।
  • नीतियों के निर्वचन एवं कार्यान्वयन पर इनपुट प्रदान करने के लिए और उनका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नीतियों/विनियमों की आवश्यकता को पहचानना।
  • हितधारक/विशेषज्ञों/आंतरिक व्यावसायिक नियुक्ति के साथ परिमाणात्मक/गुणात्मक अध्ययन के माध्यम से विनियम के प्रभाव का मूल्यांकन; अनुसंधान, विश्लेषण, रिपोर्ट का अध्ययन, विभिन्न विनियमों के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए बाजार सूचक;
  • विनियम/आदेश/दिशानिर्देशों में कमियों की पहचना करना और आयोग की भावी कार्यवाही के लिए प्रस्ताव तैयार करना; संस्तुतिकरण/भावी कार्यवाही विकसित करना, मूल्यांकन और वस्तुनिष्ठ विश्लेषण पर आधारित कार्यानीतिक योजना तैयार करना
  • नवीकरणीय ऊर्जा वरीयता टैरिफ; नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र; नवीकरणीय ऊर्जा का ग्रिड एकीकरण; आरई टैरिफ और आरईसी मामलों से संबंधित विनियमों का निर्माण और उनका कार्यान्वयन; नवीकरणीय ऊर्जा और सुसंगत ऊर्जा सांख्यिकी से संबंधित नीतिगत मामले।
  • नवीकरणीय ऊर्जा टैरिफ/आदेशों और आरईसी से संबंधित याचिकाएं;
  • नीतिगत और विनियामक मामलों (संसद संदर्भों और स्थायी समिति से संबंधित गतिविधियों सहित) पर मंत्रालयों/प्रभागों और विनियामक एजेंसियों के साथ इंटरफेस प्रदान करना;
  • विद्युत के लिए अपीलीय प्राधिकरण/उच्च न्यायालयों/सर्वोच्च न्यायालय में मामलों के लिए इनपुट/टिप्पणियाँ
  • आयोग के कार्यों/प्रचालनों को विश्लेषण करना और बदलते पर्यावरण और नीति विकास के अनुसार आयोग की गतिविधियों को सशक्त बनाने हेतु अवसरों का पता लगाना
  • सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आवश्यकता के आधार पर आयोग द्वारा यथा निर्देशित कार्य करना/कर्त्तव्यभार पूरा करना
  • अध्ययनों, मॉडल विनियमों, विनियामक आयोगों के आदेशों का विश्लेषण, बैठकों, सूचनापत्रों, टैरिफ आदेशों पर एटीई का आवधिक अनुपालन, सीजीआरएफ एवं लोकपाल, अध्यक्षों, सदस्यों और एसईआरसी के कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम, लेखा और सांविधिक अनुपालन, विधिक मामलों आदि के संबंध में विनियामक फोरम, भारतीय विनियामकओं के फोरम और अवसंरचना विनियमन के लिए दक्षिण एशिया फोरम की गतिविधियाँ।
  • आयोग के कार्य (आयोग की बैठकें); केन्द्रीय सलाहकार समिति (सीएसी) की बैठकें आदि
  • वार्षिक रिपोर्ट और अन्य प्रकाशन

केविविआ का अर्थशास्त्र प्रभाग मुख्यतः पावर एक्सचेंजों, व्यापार अनुज्ञप्तिधारियों और संवर्धन दरों से संबंधित याचिकाओं का निपटान करता है। यह प्रभाग मासिक और वार्षिक बाजार निगरानी रिपोर्ट और संवर्धन दरों के संबंध में अधिसूचनाएं तैयार करता है। अर्थशास्त्र प्रभाग के प्रमुख कार्य निम्नानुसार हैं:

  • पावर एक्सचेंजों से संबंधित याचिकाओं, अंतर-राज्यिक व्यापार अनुज्ञप्तिधारियों के अनुपालन और प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से परियोजनाओं के लिए लागू संवर्धन दरों का निपटान करना।
  • पावर बाजार से संबंधित विनियमों को तैयार करना और उनका संशोधन, अंतर-राज्यिक व्यापार अनुज्ञप्ति और व्यापार मार्जिन जारी करना। टैरिफ विनियमों के लिए इनपुट प्रदान करना।
  • वितरण अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा विद्युत की खरीद के लिए और पारेषण सेवाओं के लिए बोली प्रक्रिया द्वारा टैरिफ के अवधारण हेतु एमओपी के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक छह मास में विभिन्न संवर्धन कारकों और अन्य मानदंडों के संबंध में अधिसूचनाएं तैयार करना।
  • व्यापार विनियमों, व्यापार मार्जिन विनियमों और पावर बाजार विनियमों के संबंध में अनुपालन निगरानी।
  • बाजार निगरानी के भाग के रूप में अल्पकालिक विद्युत बाजार के संबंध में मासिक और वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना।
  • पावर एक्सचेंजों की समीक्षा।

संगठन की दक्षता और प्रतिक्रिया में सुधार के उद्देश्य से एमआईएस आयोग में मूलभूत कार्यों में कार्यनीतिक कारोबार साझेदार की भूमिका निभाता है। एमआईएस निम्नलिखित प्रमुख कार्यों के लिए उत्तरदायी है:

  • वेबसाइट प्रबंधन
  • सॉफ्टवेयर – इन-हाउस विकसित या बाजार से क्रय किया गया
  • नेटवर्क और सुविधा प्रबंधन
  • पुस्तकालय प्रबंधन

प्रशासन एवं लेखा प्रभाग का प्रमुख कार्य है:

  • केविविआ की मानव संसाधन आवश्यकताओं, वेतन, अनुलब्धियाँ एवं ईपीएफ, कर्मचारियों का छुट्टी प्रबंधन, कर्मचारियों के मूल विभागों के साथ संपर्क की देख-रेख करना।
  • केविविआ के वेतनपत्रक और लेखा, आयकर विवरण, बजट, ईपीएफ प्रेषण, व्यय और अनुमोदन, तिमाही/वार्षिक लेखांकन रिपोर्ट तैयार करना, एमओपी को रिपोर्ट प्रस्तुत करना।